Wednesday, 24 December 2014

तेरी याद


तेरी याद जब भी अश्क बनती हे
मानो मेरी आँखों में जीवित हो उठती हे
इन आँखों से तुझे देख पाने का भाग्य नहीं
बस यादें ही हे  जिनमे तू मुझे दिखती हे ....

तेरी खुशिया बस मेरी ख़ुशी थी
मेरी जिन्दगी बस तेरी हंसी थी
आज तेरी हंसी सुन नहीं सकता मगर
तेरी गूंजती खिलखिलाहट मुझे खुश रखती हे ....

तेरी वो आँखे जिनमे जहाँ था मेरा
हर सपना तूने उनमे देखा था मेरा
आज वो आँखे नहीं तो सपने भी बिखर गए
मगर मेरी आँखों में तो बस तू ही दिखती हे .....

तेरी याद मेरे जीवन का आधार हे
मेरा हर सपना इसी से साकार हे
वादा हे दुखी होके दुःख न दूंगा तुझे
तू न होके भी मेरे लिए मायने रखती हे ....
   
                 (सिर्फ तेरी याद में)

No comments:

Post a Comment