Monday, 22 June 2015

प्रेम का कच्चापन

इश्क़ जब हो जाये धूमिल,
तो याद आती नहीं..
कि कमबख्त याद लाने को
भी याद करना पड़ता हे....

कल तक याद आती थी कि
उस बहाने संभल जायेंगे हम ...
कि अब तो याद के आते ही,
डर के संभल जाते हे हम....

लगू जो भूलने तुझको
की झट से याद करता हू ..
की तूझे भूलने से भी ,
तो साला दिल ये डरता हे..

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